सारे चैनल देख लिये
सारे अख़बार पढ़ लिये
रिश्तेदारों से भारत भर
में बातें हो गईं
पडौसी से अबोला था
वह भी टूट गया
जो न पढ़ने थे
वे चिट्ठे भी पढ़ लिये
गली में क्रिकेट भी हो गया
दाल-चावल भी खा लिये कई बार
राजनीति भी हो ली
और ख़ून की होली
सारे शगुन तो हो गए
कर्फ़्यू भी चल गया दिन रात
सियासत की बिछी बिसात
अब थोड़ी हवा आने दो न
चार साल के बाद अपने प्रिय ठिकाने पर !
9 years ago
